Rangoon
फिल्म:- रंगून म्यूजिक डायरेक्टर:- विशाल भरद्वाज गीतकार:- गुलज़ार
१."Bloody Hell"
फिल्म के पहले गाने का नाम है " ब्लडी hell", काफी catchy टाइटल है और गाना बनाया भी उसी अंदाज़ में हुआ है।
सुन कर ऐसा लगता है जैसे लाइन कहि सुनी हुई है, फिर आपको अमिताभ जी का वो ई कैन टॉक इंग्लिश ई कैन वाक इंग्लिश वाला डायलॉग याद आ जायेगा। पूरा गाना इसी अंदाज़ में लिखा गया है, एक तरह से ये गाना फिल्म का आइटम सांग है ।
२. "ye ishq hai"
गुलजार जी मेरे सबसे पसंदीदा गीतकार है, आजकल के catchy लिरिक्स के ज़माने में, वो बस कुछ चुनिंदा लोगो की मूवीज में ही अपनी कलम का कमाल दिखा पाते हैं ।
रंगून एक पेरियोडिक फिल्म है और विशाल भरद्वाज ने पूरी कोशिश की है उस ज़माने के म्यूजिक को फिल्म में फिट करने की ।
फिल्म वर्ल्ड वॉर २ पर आधारित है और उस वक़्त वैसे तो इंग्लिश प्रयोग नही होती थी, लेकिन मूवी रिलीज़ २०१७ में हो रही है तो दर्शको को समझ भी आनी चाहिए शायद इसीलिए लिरिक्स और जहा तक मुझे लगता है मूवी भी शुद हिंदी में तो नही होनी चाहिए ।
गाना सुरु होता है :-
I the walking, walk walk walk
walk walk walk, walk walk walk
He the talking, talk talk talk
talk talk talk, talk talk talk...(x2)
गुलज़ार जी ने अपने अंदाज़ में इस गाने में भी आजकल की तरह सीधे फूहड़ लिरिक्स ना प्रयोग करते हुए सांकेतिक चीज़ों का सहारा लिया है जो की एक कवी के पास होना जरुरी है
"खुल्लम खुल्ला दो होठों का
जाम पिया अंग्रेजी में "
इन लाइन से कवी का जो अभिप्राय है वो आप समझ ही गए होंगे। 😆😢😆😆😆😆
उसके बाद जो लाइन मुझे इस गाने में काम की लगी या ये कहे की गुलज़ार सर के लेवल की लगी वो है
"उड़ जाता था कहीं कही
असमा पे लेके ज़मीन "
बाकी सारा गाना नार्मल लगा
फिल्म का दूसरा या यूँ कह ले की फिल्म का सबसे बेहतरीन गाना जो एक बड़ा हिट होने वाला है
"ये इश्क़ है"
ये गाना हर लहजे से एक क्लासिक बनने का दम रखता है
विशाल ने बहुत कमल का कम्पोजीशन किया है
गुलज़ार सर ने बहुत ही उम्दा तरके से कम्पोजीशन का मान रखा है
बाकि का काम अरिजीत सिंह की आवाज़ ने कर दिया है
"सूफी के सुल्फे की लो उठ के कहती है
आतिश ये बुझ के भी जलती ही रहती है
ये इश्क़ है "
आज के वक़्त में भी अगर कोई ऐसे शब्द लिख सकता है तो वो है गुलज़ार जी। इश्क़ का ऐसा महिमामंडन मेने पहेली बार देखा है। इन लिरिक्स का गहन अर्थ एक सुल्फे वाला ही आप को बता सकता है । 😉
"साहिल पे सर रख के दरिया ये सोया है, सदियो से बहता है आँखों ने बोया है"
ये इश्क़ है
तन्हाई धुनता है, परछाई बुनता है
रेशम सी नज़रो को आँखों से सुनता है
ये इश्क़ है"
इतनी खूबसूरत और सत्य बातें एक लाइन में बस गुलज़ार सर ही लिख सकते है ।
"सूफी के सुल्फे की लो उठी अल्लाह हू
जलते ही रहना है बाकि ना में ना तू "
ये इश्क़ है
बेखुद सा रहता है ये कैसा सूफी है
जागे तो तबरेज़ी बोले तो रूबी है
ये इश्क़ है"
गुलज़ार सर ने कितनी आसानी से बता दिया की इश्क़ से बढ़कर कुछ नही, इस गाने की हर एक लाइन बहुत मीनिंग फूल और थोड़े में बहुत कुछ कहने वाली है। में तो गुलज़ार सर का फैन हु ही ऐसे गाने लिखते रहे तो फैन और भी बढ़ेंगे ।
है एक बात है इस गाने कम्पोजीशन आपको बार बार एक सुपरहिट गाने की याद दिला देगी "दिल से रे" मुझे तो कई बार लगा ।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें